कोलकाता : शहर के ऐतिहासिक शिक्षण संस्थानों में शामिल सेंट थॉमस स्कूल के 237 साल पुराने हॉस्टल भवन को अब विधि शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। किडरपुर स्थित इस ऐतिहासिक इमारत में बिशप कैनिंग लॉ कॉलेज की शुरुआत होगी। यहां पांच वर्षीय बीए एलएलबी (BA LLB) पाठ्यक्रम संचालित किया जाएगा। कॉलेज को भारतीय बार काउंसिल (BCI) से मंजूरी मिल चुकी है। उद्घाटन 5 नवंबर को स्कूल परिसर में प्रस्तावित है।
1789 में हुई थी सेंट थॉमस स्कूल की स्थापना
डायमंड हार्बर रोड स्थित सेंट थॉमस स्कूल की स्थापना वर्ष 1789 में हुई थी। इसे कोलकाता के सबसे पुराने संचालित स्कूलों में गिना जाता है। स्कूल में स्थानीय विद्यार्थियों के साथ-साथ ब्रिटिश विद्यार्थियों को भी शिक्षा दी जाती थी।
शहर के बाहर से आने वाले छात्रों के लिए यहां हॉस्टल की सुविधा भी उपलब्ध थी। समय के साथ यह हॉस्टल कई पीढ़ियों के विद्यार्थियों का आश्रय बना रहा। यहां एंग्लो-इंडियन समुदाय और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे भी रहकर पढ़ाई करते थे।
चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया के कोलकाता डायोसिस की पहल
इस लॉ कॉलेज की स्थापना की योजना चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया (CNI) के कोलकाता डायोसिस ने वर्ष 2021 में बनाई थी। संस्थान का नाम बिशप कैनिंग लॉ कॉलेज रखा गया है। बिशप परितोष कैनिंग ने सोमवार को सेंट पॉल्स कैथेड्रल में जानकारी दी कि कॉलेज को भारतीय बार काउंसिल की मंजूरी मिल गई है। इसके बाद कॉलेज के उद्घाटन का रास्ता साफ हो गया है। यहां पांच वर्षीय एकीकृत बीए एलएलबी पाठ्यक्रम के जरिए विद्यार्थियों को कानून की शिक्षा दी जाएगी।
हॉस्टल के विद्यार्थियों को दूसरे छात्रावासों में भेजा गया
लॉ कॉलेज के लिए जगह उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पुराने हॉस्टल में रह रहे विद्यार्थियों को दूसरे छात्रावासों में स्थानांतरित कर दिया गया है। इस बदलाव के साथ ऐतिहासिक इमारत का उपयोग छात्रावास से बदलकर उच्च शिक्षा के लिए किया जाएगा।
यह भवन लंबे समय से स्कूल की शैक्षणिक विरासत का हिस्सा रहा है। अब यहां विधि शिक्षा शुरू होने से परिसर को एक नई शैक्षणिक पहचान मिलेगी। कॉलेज में प्रवेश प्रक्रिया, सीटों की संख्या और फीस से संबंधित विस्तृत जानकारी की घोषणा के बारे में कोई विवरण नहीं दिया गया है।
