कोलकाता : पश्चिम बंगाल में आगामी नगर निकाय चुनावों को लेकर कांग्रेस ने अपनी रणनीति के संकेत देने शुरू कर दिए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार के बयान से स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी सड़क पर अन्याय के खिलाफ दूसरे विपक्षी दलों के साथ आंदोलन कर सकती है, लेकिन चुनावी मैदान में अपनी अलग ताकत आजमाने की तैयारी में है।
कांग्रेस ने उम्मीदवार बनने के इच्छुक लोगों से बायोडाटा भी मांगे हैं। आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख 28 अक्टूबर निर्धारित की गई है। राज्य में कोलकाता और हावड़ा नगर निगम चुनाव की तैयारियों के बीच कांग्रेस का यह रुख अहम माना जा रहा है।
पार्टी के सामने अपनी संगठनात्मक ताकत बढ़ाने और कार्यकर्ताओं को चुनाव लड़ने का अवसर देने की चुनौती है। वहीं, विपक्षी दलों के बीच सड़क पर साझा आंदोलन और चुनावी गठबंधन के सवाल पर अलग-अलग रुख देखने को मिल रहा है।
शुभंकर सरकार का संदेश—आंदोलन में साथ, चुनाव में अलग राह
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने कहा कि कांग्रेस अपने स्तर पर चुनाव की तैयारी कर रही है और समय तथा परिस्थितियों के अनुसार फैसला लिया जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि अन्याय के खिलाफ सड़क पर कई राजनीतिक दल एक साथ खड़े हो सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे चुनाव भी मिलकर लड़ेंगे।
उनके बयान से यह संकेत मिला है कि कांग्रेस फिलहाल निकाय चुनावों में अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान और संगठनात्मक क्षमता पर जोर देना चाहती है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि अपने उम्मीदवार उतारने से कार्यकर्ताओं को चुनाव लड़ने के अधिक अवसर मिल सकते हैं।
उम्मीदवारों से बायोडाटा मांगे, 28 अक्टूबर तक आवेदन
नगर निकाय चुनाव की तैयारियों के तहत कांग्रेस ने उम्मीदवार बनने के इच्छुक लोगों से बायोडाटा मांगे हैं। यह अवसर केवल पार्टी के मौजूदा कार्यकर्ताओं तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि पार्टी से बाहर के इच्छुक लोगों को भी आवेदन करने का मौका दिया गया है। 28 अक्टूबर आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख है।
इस पहल के जरिए प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व उम्मीदवारों के चयन और चुनावी तैयारियों को आगे बढ़ाना चाहता है। पार्टी की रणनीति का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि यदि गठबंधन नहीं होता है, तो अधिक सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की संभावनाएं खुली रहेंगी।
तृणमूल और माकपा के साथ गठबंधन पर क्या है रुख?
कोलकाता और हावड़ा नगर निगम चुनाव से पहले मतदाताओं के मतदान अधिकार सुनिश्चित करने के मुद्दे पर कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC), माकपा (CPM) और अन्य प्रमुख लोगों ने राज्य चुनाव आयोग को संयुक्त पत्र लिखा है। इस साझा पहल के बाद राजनीतिक गलियारों में सवाल उठने लगे कि क्या ये दल चुनाव में भी एक साथ आ सकते हैं।
हालांकि, शुभंकर सरकार के बयान से संकेत मिलता है कि साझा मुद्दों पर साथ आने को चुनावी गठबंधन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस की प्राथमिकता अपनी अलग राजनीतिक ताकत को मजबूत करना है।
इसी बीच हावड़ा नगर निगम के एक पूर्व कांग्रेस पार्षद ने तृणमूल कांग्रेस छोड़कर फिर से कांग्रेस में वापसी की। शुभंकर सरकार की मौजूदगी में हुए इस घटनाक्रम में पार्थसारथी भौमिक और शुभ्रज्योति दास भी मौजूद थे। इससे निकाय चुनाव से पहले कांग्रेस के संगठन विस्तार की कोशिशों का भी संकेत मिलता है।
